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ŚB 7.15.77
न यस्य साक्षाद्भ‍वपद्मजादिभी रूपं धिया वस्तुतयोपवर्णितम् । मौनेन भक्त्योपशमेन पूजित: प्रसीदतामेष स सात्वतां पति: ॥ ७७ ॥